…..احببتها…..

احمدعمراللحوري.

المكلاحضرموت

…..احببتها…..

ادري انها….

لاتحبني….

عشقتها….

ولا اعلم….

ماعلتي….

كيف احببتها….

صارت….

اليه….

تحفه…..

في فؤادي….

احتفظ….

بها…..

اوعنقها….

بسراب….

من ظل….

الضبابي….

واحكي…

لهامن…

فراقها….

ماصار بي…

هي حبيبة….

العمر….

لاارقد….

الا وافتش….

في جميع….

مذكراتي….

واكتب….

مايمليه…

لها….

اكتب…

بماء…

الورد…

والذهب….

انحت….

اسمها…..

في الصخور….

انقش….

لاجعلها….

لي افتخر….

بها…..

آه يازمن….

عاندتني….

ولبست….

ثوب….

العشق….

ولم استطيع….

لسهيدة….

احاكيها….

مايعانيه….

وجداني….

حوله…..

لازمتني….

منذو….

رايتها…..

تغلق….

عليه….

حديثي….

لها…..

لانها…..

لاتعرف….

العشق….

ولاكلام….

العشاق….

افتخر…..

اني….

عرفتها….

وكاني….

ظليت….

طريقي….

فيا سهية….

اكفني….

طريق…

لم يمر….

بهاآدميا….

لازرع….

ارواح….

قلوب….

من ذهب….

نسادات….

تبعث….

مردات….

من البخور….

اقلبي….

ايهتا…

السماء…

بسحب…

من غيث…

صيب…..

يروي….

حرثي….

فاعقلي….

قدادمن….

هديان….

الشعري….

ونمارش….

من الشهب….

تغازل….

عيني….

لكي….

لاارقدو….

لكنها….

امطرتني….

بالسكوت….

ليجنح….

بي الليل….

محمل….

بالهموم….

وسكونه….

يقتلني….

لاداء….

الضميري….

اني خدعت….

نفسي….

عندما….

احببتها…

وعشقت….

عينيها…..

الجميلتين….

عند انظر….

اليها….

كانها….

تناديني….

لكني….

رايتها….

تخدعني….

تذغذغ….

مشاعري….

بصوتها….

الانوثي….

نبرته…..

لسادي….

هواء….

يمربين….

اوراق….

الشجر….

سااغادر….

عنها….

دون…

ضرر…

واحتفظ…

بما املكه….

من حبي….

لهالانها….

فارق….

الهامه….

بيني….

وبينها…..

اقطعت….

شراين…

قلبي….

مسكين….

هذا الموهوم….

اجبرني….

لها….

لتدلني….

بحبي….

سااقطع….

ارداد….

الغرام….

والعشق…..

واتنحي….

عنها….

وان كان….

الشوق….

ياتي….

لانحرته….

بحربتي….

وقلم شعري….

وحرقت…..

جميع….

مذكرات….

عشقي…

ورقدت…

ع نارها….

لاطهر….

غليل….

العذاب…

باس….

لقلب….

راء….

ولم يراء….

نفسه….

طمع….

في عنقود….

عنب….

بينه امتار….

لايستطيع….

يقطفه…..

ولايقطف….

وروده….

اجردتي…..

ياصواعق….

احرقيني….

لاكون رماد…..

واجرح…..

من حبيب….

عشقته….

بحسن الخلق….

ولم احمله….

كرهه….

سعادتها….

تفرحني….

لكنها تهملني…..

لانها لايدوم…..

لها الوقت…..

لتظلمني…..

ان ارتادت….

اغادر قلبها….

لغادرت….

دون اجرحها…..

فلتعيش…..

كما يحلو….

لها قلبها…..

ولم اسال….

عنها لتدلني….

احمدعمراللحوري.

المكلاحضرموت

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